The Secret of Life- Never Stop Learning, because Life Never Stops Teaching.
दौलत, शोहरत, क़ामयाबी, अच्छे रिश्ते, पद-प्रतिष्ठा और मन की शांति, ये हर किसी के जीवन की अभिलाषा होती है। क्योंकि जीवन में कोई भी असफल नहीं होना चाहता। कोई भी अधकचरा नहीं रहना चाहता। लेकिन यदि हम ग़ौर से देखें तो, ज़्यादातर लोगों का जीवन लाख कोशिशों के बावज़ूद वैसा नहीं होता, जिसकी कल्पना इंसान अपने शुरुआती दिनों में करता है।
इसकी वज़ह यह है कि इंसान जो चाहता है और जो करता है, दोनों में बहुत विरोधाभास होता है। हम चाहते तो बहुत कुछ हैं मगर ज़ोख़िम नहीं लेना चाहते, सुरक्षित खेलना चाहते हैं। फलस्वरूप हम एक बने बनाए ढर्रे पर चल पड़ते हैं, यह जानते हुए भी कि इस रास्ते पर चल कर कोई कहीं नहीं पहुँचा है। सभी एक औसत जीवन जीने को अभिशप्त हैं।
जिन लोगों ने जीवन में कुछ बड़ा हासिल किया है, यदि उनके जीवन और कार्यों को देखने का साहस करें, तो पाएँगे कि उन्होंने ज़ोख़िम लिया और समाज के बने-बनाए रास्ते पर चलने से इंकार कर दिया। उन सबने या तो उस रास्ते को अपनाया जिस पर चलकर लोग क़ामयाब हुए या अपना रास्ता ख़ुद बनाया। यही सफल जीवन का रहस्य(The Secret of Life) है।
जब भी कोई इंसान जीवन में कुछ बड़ा करने निकलता है, तब उसे जीवन के नये-नये अनुभवों से गुज़रना होता है। जीवन के रहस्यों (The Secret of Life) का उद्घाटन करना होता है।
हर सफलता के पीछे जीवन के कुछ ऐसे रहस्य (The Secret of Life) होते हैं, जिन्हें यदि जान लिया जाय और पूरी ईमानदारी से अमल में लाया जाय तो क़ामयाबी हर किसी के बाएं हाथ का खेल हो सकती है। इस शृंखला में हम जीवन के रहस्यों (The Secret of Life) पर से एक-एक करके पर्दा उठाने की कोशिश करेंगे।
इस अंक में हम बात करेंगे The Secret of Life No.01- Never Stop Learning, because Life Never Stops Teaching की।
ज्ञान या शिक्षा इंसान के जीवन के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। लेकिन आज के समय में हर कोई अपने आप को ज्ञानी समझने लगा है। कोई किसी को सुनना नहीं चाहता, हर कोई बस अपना ही ज्ञान बाँटना चाहता है। जबकि हमारे जीवन में होने वाली हर घटना या हमारे सम्पर्क में आने वाला हर व्यक्ति कोई न कोई सीख दे जाता है।

“The world is a university and everyone in it is a teacher. Make sure when you wake up in the morning, you go to school.” ―T. D. Jakes
इंसान को हमेशा सीखते रहना चाहिए, क्योंकि यह जीवन का महान रहस्य (The Secret of Life) है। जैसे ही हमारे मन में यह भाव आता है कि मैं सब कुछ जानता हूँ, वैसे ही हमारी प्रगति रुक जाती है।
मनु स्मृति में एक श्लोक है जिसके अनुसार 7 चीजें ऐसी हैं जिन्हें लेने में कभी भी किसी को संकोच नहीं करना चाहिए। जहां कहीं से भी या किसी से भी यह 7 चीज़ें मिलें उन्हें ले लेना चाहिए। बगैर ये सोचे कि जिस जगह से या जिस व्यक्ति से हम यह चीज़ ले रहे हैं वह अच्छा है या बुरा। उन सात में से एक है ज्ञान या शिक्षा। इस संदर्भ में रामायण का एक प्रसंग है:
राम-रावण का युद्ध समाप्त हो चुका था। चारों तरफ ख़ून की नदियाँ बह रही थीं। युद्ध का मैदान दोनों ही दलों के वीरगति प्राप्ति योद्धाओं के शवों से पटा हुआ था। चील-कौवे और जानवर शवों को नोच-नोच कर खा रहे थे। युद्धोपरांत विभीषिका स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी। शमशान जैसा सन्नाटा चारों ओर पसरा हुआ था। युद्ध में पराजित रावण अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा में दर्द से कराहता हुआ ज़मीन पर पड़ा था।
इसी घोर शांति और शोक के बीच श्रीराम, भाई लक्ष्मण को बुलाते हैं।
आज्ञाकारी लक्ष्मण पास आते हैं, प्रणाम करके कहते हैं- “प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है?”
श्रीराम ने कहा प्रिय लक्ष्मण! मेरे पास आपके लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है।
रावण में लाख दोष हैं, परंतु वह एक महान व्यक्ति हैं। बहुत ही विद्वान, ज्ञानी, एक महान शिव भक्त। एक परोपकारी, चक्रवती, गायक, संगीतकार, वीणा के विशेषज्ञ, वेदों को दिल से जानने वाले। कृपया उनके पास जाएं, सम्मान और आदर से उनसे अनुरोध करें कि वे इस दुनिया से जाने से पहले अपनी शिक्षा हमारे साथ साझा करें। क्योंकि ज्ञानी और अनुभवी व्यक्ति लाख बुराइयों के बाद भी श्रेष्ठ होता है।
आज्ञाकारी लक्ष्मण तुरंत युद्ध भूमि पर जाते हैं, जहाँ रावण मृत्यु शैय्या पर लेटा होता है। लक्ष्मण सिर के पास खड़े हो गये। पैरों की आहट से रावण समझ जाता है कि लक्ष्मण उसके सिर के पास खड़े हैं, रावण चुप रहता है। लक्ष्मण बहुत देर तक प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन रावण ने एक भी शब्द नहीं बोला। निराश लक्ष्मण लौटकर राम को सारी बात बताते हैं कि क्या हुआ।
सर्वज्ञ श्रीराम मुस्कुराते हुए लक्ष्मण से बोले। प्रिय लक्ष्मण! ज्ञान और शिक्षा ज्ञानी या गुरू के चरणों में बैठने से मिलती है, उनके बराबर या सिरहाने बैठकर नहीं। रावण एक ज्ञानी पुरुष हैं, सम्मान और आदर के साथ उनके चरणों में बैठकर विनम्रता से अनुरोध करें ताकि वह अपनी शिक्षा प्रदान कर सकें।

The Secret of Life- Never Stop Learning, because Life Never Stops Teaching.
लक्ष्मण वापस जाते हैं और रामाज्ञा के अनुसार रावण के चरणों के पास खड़े होते जाते हैं। लक्ष्मण को फिर से आया देख दर्द से कराहता रावण मुस्कुराता है और उनका स्वागत करता है। आदरणीय लक्ष्मण! आपका स्वागत है; मैं आपकी कैसे सेवा कर सकता हूँ? लक्ष्मण अपराध बोध के कारण चुप रहते हैं। सर्वज्ञानी रावण लक्ष्मण के आने का प्रयोजन समझ जाता है। वह लक्ष्मण से अपने पास आने का अनुरोध करता है ताकि वह अपनी बात कह सके।
रावण ने लक्ष्मण से कहा कि मेरे पास समय कम है इसलिए मैं अपने जीवन की तीन महत्वपूर्ण ग़लतियों से जो सीखा है वह आपको बताता हूँ:
सबसे पहली बात रावण ने लक्ष्मण से कही- शुभ कार्य को यथाशीघ्र पूर्ण कर लेना चाहिए और अशुभ कार्यों में जितना हो सके विलंब करते रहना चाहिए। अर्थात “शुभस्य शीघ्रम्।”
मैंने श्रीराम को पहचानने में विलम्ब किया और उनके आश्रय में आने में न केवल विलम्ब किया बल्कि उनके साथ युद्ध भी किया। इसलिए आज इस गति को प्राप्त हुआ।
दूसरी बात जो रावण ने लक्ष्मण से कही वह थी- कभी भी अपने शत्रु को कमज़ोर नहीं समझना चाहिए। उसने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर अमरता का वरदान माँगा तो कहा कि नर और वानर के अलावा उसे कोई न मार सके। क्योंकि उसे लगता था कि ये दोनों जीव तो उसे मार ही नहीं सकेंगे। इसी ग़लतफ़हमी में राम की वानर सेना को अक्षम और कमज़ोर समझ बैठा और उनसे युद्ध हार गया।
तीसरी और अंतिम बात रावण ने लक्ष्मण से कही कि- संसार में किसी से भी अपने जीवन के रहस्य प्रकट नहीं करना चाहिए, चाहे वह कोई अपना सगा ही क्यों न हो। यहाँ भी रावण ने ग़लती की क्योंकि विभीषण को उसकी मृत्यु का रहस्य पता था। रावण जानता था कि यह उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल है।
इसी प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की एक घटना है, जिसने उन्हें एक छत्रपति सम्राट बना दिया।

एक बार कि बात है शिवाजी महाराज लगातार युद्धों में पराजित हो रहे थे। एक दिन जंगल में भटकते-भटकते वे एक कुटिया के पास जा पहुंचे। कुटिया में एक वृद्ध महिला को देखकर उससे बोले, “माई बहुत भूख लगी है, कुछ खाने को मिलेगा?” उस वृद्ध महिला ने समझा कि कोई सैनिक है और कहा, “बैठो मैं तुम्हारे लिये कुछ खाने को लाती हूँ।”
कुछ ही देर में वृद्ध महिला ने एक थाली में गरमा गरम खिचड़ी परोस कर शिवाजी के सामने रख दिया। जैसे ही शिवाजी ने खिचड़ी देखी, अधीरतावश उसमें अपनी उंगली डाल दी और उसे जला बैठे। यह देखकर वृद्ध महिला ने मुस्कुराते हुए कहा- “तुम्हारा चेहरा तो शिवाजी से मिलता ही है, तुम उसी की तरह मूर्ख भी हो।”
यह सुनकर शिवाजी आश्चर्य से बोले- “माई तुम यह कैसे कह सकती हो की शिवाजी मूर्ख हैं जबकि उन्होंने तो इतने सारे राज्यों पर विजय पायी है?”
महिला फिर बोली- “शिवाजी भी तुम्हारी तरह मूर्ख है। जैसे तुमने अधीरता में गरम खिचड़ी के बीच में हाथ डालकर अपनी उंगली जला ली, जबकि तुम चाहते तो किनारे से ठण्डी खिचड़ी खाना शुरु करते तो तुम्हारा हाँथ भी नही जलता और तुम खा भी लेते। इसी तरह से शिवाजी भी यदि किनारे के छोटे-छोटे राज्यों पर आक्रमण कर उन्हें अपने अधीन कर ले तो बड़े राज्यों को आसानी से जीत सकता है और उसे हार का सामना भी नही करना पड़ेगा।”
शिवाजी को युद्ध की नई रणनीति मिल गयी थी। इतिहास गवाह है कि आगे उन्होंने इसी रणनीति से एक विशाल मराठा साम्राज्य की स्थापना की और छत्रपति शिवाजी महाराज कहलाये।
ऐसी ही छोटी-छोटी घटनाओं से बड़े आविष्कार होने और लोगों के महान बनने के उदाहरण मिलते हैं। जैसे पेंड़ से गिरते हुए फल को देखकर सर आइज़ैक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के नियम का आविष्कार कर दिया। यदि आप थोड़ा research करें तो ऐसे अनेकों उदाहरण मिल जायेंगे।
‘जो सीखता है, वही जीतता है।’ सूचना और प्रौद्यौगिकी के वर्तमान युग में यदि हमें ख़ुद को प्रतिस्पर्द्धा में बनाये रखना है तो हमें हर रोज़ कुछ न कुछ सीखते रहना होगा, वरना हम सफलता की दौड़ में बहुत पीछे रह जायेंगे।
अभी आपने पढ़ा पहला The Secret of Life – Never Stop Learning, because Life Never Stops Teaching.
आशा है कि हमारा यह प्रयास जीवन को समझने में आपकी कुछ मदद कर पाया होग। आप अपने अनुभव और राय नीचे कमेण्ट कर के हमें ज़रूर बताएं, ताकि आगे के आलेखों में हम और अच्छा कर पाएं। साथ ही यदि आप किसी विषय विशेष पर पढ़ना चाहते हैं तो कृपया ज़रूर बताएं, हम पूरी कोशिश करेंगे आपके लिए एक सारगर्भित लेख प्रस्तुत करने की।